नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि दिल्ली...
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में लगभग ₹50 से ₹60 करोड़ की कीमत के विदेशी मेडिकल उपकरण केवल मैनपावर (स्टाफ) की कमी और जरूरी एक्सेसरीज न होने के कारण बिना इस्तेमाल के पड़े हुए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट दिल्ली सरकार के अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू बेड की उपलब्धता और इमरजेंसी हेल्पलाइन के कामकाज पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा था। बेंच उन ऑडिट रिपोर्टों की जांच कर रही थी जो अस्पतालों ने 3 जुलाई के आदेश के बाद दाखिल की थीं।
🏥 कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी अस्पताल के हालात चौंकाने वाले: 400 वेंटिलेटर स्टोर में बंद
हाई कोर्ट ने दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल की स्थिति पर गहरा असंतोष जताया:
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट: कोर्ट ने कहा कि कैंसर इंस्टीट्यूट में हालात सबसे खराब हैं। वहां सभी महंगे और विदेशी उपकरण बिना किसी उपयोग के पड़े हैं।
जीटीबी अस्पताल में लापरवाही: अस्पताल के स्टोर रूम में 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बिना इस्तेमाल के बंद पड़े थे। इसके अलावा अस्पताल की ईसीजी (ECG) मशीन भी काम नहीं कर रही थी।
📋 17 अगस्त को बैठक का आदेश: मशीनों को चालू करने पर फोकस, जांच से इनकार
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए निर्देश जारी किए:
अधिकारियों की संयुक्त बैठक: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव और सेवा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे 17 अगस्त को सभी सरकारी अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के साथ बैठक करें।
मशीनों का ट्रांसफर: जो मशीनें एक जगह इस्तेमाल नहीं हो रही हैं, उन्हें तुरंत उन अस्पतालों में ट्रांसफर किया जाए जहां उनकी सख्त जरूरत है।
जांच के बजाय काम पर जोर: कोर्ट ने कहा कि वे किसी लंबी जांच प्रक्रिया में पड़कर समय बर्बाद नहीं करना चाहते, बल्कि पहली प्राथमिकता इन सभी जीवन रक्षक मशीनों को तुरंत चालू करवाने की है।
💻 NIC का सरप्राइज ऑडिट: 'नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल' सिस्टम की खुली पोल
3 जुलाई को कोर्ट ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को दिल्ली सरकार के 38 अस्पतालों में 'नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' के ऑडिट का जिम्मा सौंपा था:
पोर्टल और आईसीयू बेड: ऑडिट का उद्देश्य यह जांचना था कि क्या पोर्टल पर आईसीयू बेड की उपलब्धता सही दिखाई जा रही है और इमरजेंसी कॉल्स का जवाब दिया जा रहा है या नहीं।
कमी उजागर: एनआईसी की ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि अस्पतालों में तकनीकी मैनपावर, कंप्यूटर सिस्टम और बुनियादी सामान की भारी कमी है, जिससे डिजिटल और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ठप पड़ा है।
📅 अगली सुनवाई 18 सितंबर को: स्वास्थ्य सचिव को जवाब दाखिल करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने हेल्थ सेक्रेटरी को सख्त निर्देश दिया है कि एनआईसी (NIC) की ऑडिट रिपोर्ट को सभी सरकारी अस्पतालों के प्रमुखों को भेजा जाए:
कदमों की रिपोर्ट: स्वास्थ्य सचिव को यह बताना होगा कि कमियों को दूर करने और स्टाफ की भर्ती के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
अगला सरप्राइज ऑडिट: एनआईसी को अस्पतालों का एक और सरप्राइज ऑडिट करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

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