नई दिल्ली: दिल्ली कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयो...
नई दिल्ली: दिल्ली कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमित किए जाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले को दिल्ली के शैक्षणिक ढांचे के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह विधेयक राजधानी में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था तैयार करेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है।
🎓 अब बेहतर शिक्षा के लिए नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली से बाहर: छात्रों और परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में अब तक निजी विश्वविद्यालयों के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं था:
पलायन पर रोक: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हर साल हजारों छात्रों को पड़ोसी राज्यों या विदेशों का रुख करना पड़ता था, जो अब बंद होगा।
आर्थिक बचत: दिल्ली में ही प्रतिस्पर्धी और प्रीमियम संस्थान उपलब्ध होने से परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक और रहने-खाने का बोझ काफी कम होगा।
सामाजिक जुड़ाव: छात्र अपने परिवार और सामाजिक परिवेश में रहकर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।
🏢 सीमित भूमि के अनुरूप आधुनिक 'वर्टिकल कैम्पस' का मॉडल: बहुमंजिला इमारतों में चलेंगी यूनिवर्सिटीज
दिल्ली की भौगोलिक सीमाओं और सीमित भूमि उपलब्धता को देखते हुए इस विधेयक में एक नया और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया गया है:
बुनियादी ढांचे पर जोर: अब विशाल भू-भाग (Horizontal Campus) की अनिवार्यता के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और आधुनिक टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दी जाएगी।
शहरी परिसर: इस नीति के तहत दिल्ली जैसे महानगर में आधुनिक, बहुमंजिला और हाई-टेक 'वर्टिकल कैम्पस' (Vertical Campuses) विकसित किए जा सकेंगे।
ग्लोबल ऑफ-कैंपस: यह कानून दुनिया की शीर्ष अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थाओं को दिल्ली में अपने ऑफ-कैंपस सेंटर खोलने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
🔒 विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि: दिल्ली के छात्रों के लिए 25% कोटा और मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
विधेयक में छात्रों के अधिकारों और पारदर्शिता की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं:
25% आरक्षण: प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के स्थानीय छात्रों के लिए राज्य आरक्षण नीति के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन: विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, फीस, फैकल्टी, एडमिशन और परीक्षा प्रणाली पर नजर रखने के लिए 'दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी' बनाई जाएगी।
विशेषज्ञ समिति द्वारा जांच: किसी भी विश्वविद्यालय को मंजूरी देने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों, यूजीसी (UGC) प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों की उच्चस्तरीय समिति प्रस्ताव की गहन जांच करेगी।
💰 सरकार पर नहीं पड़ेगा कोई वित्तीय बोझ: पूरी तरह से स्व-वित्तपोषित होंगे संस्थान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय पूरी तरह स्व-वित्तपोषित (Self-Financed) होंगे:
शून्य सरकारी अनुदान: इन संस्थानों को चलाने के लिए सरकार की ओर से कोई नियमित वित्तीय अनुदान नहीं दिया जाएगा।
रिसर्च फंडिंग: हालांकि, लागू राष्ट्रीय मानकों के अनुसार वे केवल अनुसंधान परियोजनाओं (Research Projects) और शोध वित्तपोषण के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।
🌟 दिल्ली बनेगी भारत की 'नॉलेज कैपिटल': शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बड़ा बयान
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक विसंगति को अब दूर कर दिया गया है:
"दशकों तक दिल्ली ने एक अजीब विरोधाभास देखा। यह शहर प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का केंद्र तो बना, लेकिन उच्च शिक्षा का मुख्य हब नहीं बन सका। पड़ोसी राज्यों में विश्वस्तरीय प्राइवेट यूनिवर्सिटीज खुलती रहीं और हमारे बच्चे बाहर जाते रहे। यह कानून दिल्ली के युवाओं को उनके अपने शहर में सर्वश्रेष्ठ शिक्षा देकर दिल्ली को भारत की सच्ची 'नॉलेज कैपिटल' (Knowledge Capital) बनाएगा।"

कोई टिप्पणी नहीं