दिल्ली सल्तनत के 1206ई. से लेकर 1526ई और मुगल शासन के 1526ई. से 1857 तक भारत पर मुस्लिम शासकों का शासन रहा। इस दौरान मुस्लिम शासकों ने भार...
दिल्ली सल्तनत के 1206ई. से लेकर 1526ई और मुगल शासन के 1526ई. से 1857 तक भारत पर मुस्लिम शासकों का शासन रहा। इस दौरान मुस्लिम शासकों ने भारत के आसपास के देशों पर भी आक्रमण किया और वहां अपना ना सिर्फ शासन स्थापित किया, बल्कि उन देशों पर इस्लाम का बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ा। इस दौरान कुछ देश तो पूरी तरह से इस्लामिक हो गए, लेकिन भारत इस्लामिक देश नहीं बना। भारत की संस्कृति में कुछ बदलाव जरूर आए, लेकिन देश के मूल स्वभाव में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इस मामले पर बात करते हुए मशहूर शिक्षक अवध ओझा ने बड़ी वजह बताई है। आइए जानते हैं अवध ओझा ने भारत के इस्लामिक ना बनने की सबसे बड़ी वजह क्या बताई है।
क्यों इस्लामिक नहीं बना भारत?
भारत इस्लामिक क्यों नहीं बना, जबकि ईरान, इराक, पाकिस्तान और आफगानिस्तान पूरी तरह से इस्लामिक हो गए? इस सवाल का जवाब देते हुए अवध ओझा कहते हैं कि जब भारत में मुसलमानों का शासन तो इसके समानांतर एक और बड़ी घटना घटी। अवध ओझा ने बताया कि जैसे ही इस्लाम अपने बराबरी, समानता, बंधुत्व और समता के आदर्शों को लेकर भारत आया, उसी समय भारत में भक्ति आंदोलन और सूफी आंदोलन शुरू हो गया था। अवध ओझा ने बताया कि उसी दौर में कई संत सामने आए, जिन्होंने उपनिषद और कई ग्रंथों को लोगों तक पहुंचाना शुरू किया, जिसने सांस्कृतिक आक्रमण को संभाल लिया और भारत इस्लामिक नहीं बना।
भारतीय उपमहाद्वीप में कब से कब तक रहा इस्लामिक शासन
साल 1206 में भारत में दिल्ली सल्तनत की शुरुआत के साथ ही इस्लामिक शासन की शुरुआत हुई और ये करीब 320 सालों तक रहा। 1526 तक दिल्ली सल्तनत के शासन के बाद मुगलों का शाशन शुरू हुआ। इस दौरान बाबर से लेकर बहादुर शाह जफर के शासनकाल में 1857 तक मुगलों का शासन रहा। इसके बाद से औपचारिक रूप से देश में इस्लामिक शासन खत्म हो गया। इस तरह कुल 651 सालों तक भारत में इस्लामिक शासन माना जाता है। इतने सालों तक लगातार शासन के बाद भारत इस्लामिक नहीं बना। अवध ओझा ने उसकी सबसे बड़ी वजह भक्ति आंदोलन और सूफी आंदोलन को बताया है।
कौन हैं अवध ओझा
देश में डिजिटल क्रांति आने के बाद पिछले 10 सालों में यूट्यूब पर जो नाम सबसे ज्यादा वायरल रहे और अब भी जिनकी रीलें सबसे ज्यादा वायरल होती रहती हैं। इसके अलावा अवध ओझा राजनीति में भी हाथ आजमा चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों में पटपड़गंज विधानसभा सीट से मिली चुनावी हार के बाद ओझा ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया था। इन सबके अलावा अवध की एक पहचान ये भी है कि वो अवध ओझा यूपीएससी अभ्यर्थियों को पढ़ाते हैं।

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