'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद एवं जलवा...
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन अब भी लगातार जारी है। CJP नीट जैसी अहम परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे मांग कर रही है। सोनम वांगचुक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अड़ियल रवैया छोड़कर लोगों की बात सुनने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश में ईमानदारी की कोई अहमियत नहीं है। सब कुछ बेईमानी पर चल रहा है। एग्जाम पेपर से लेकर वोट तक हर चीज बिकता है। बता दें कि, CJP का विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था, जबकि वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में सभी दलों के नेताओं से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए क्या किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से यह समस्या हल हो सकती है?
ऐसा बिल्कुल नहीं होगा, लेकिन हां इससे जवाबदेही तय करने का रास्ता जरूर बनेगा। सरकार इसके लिए जब तक किसी जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक मनमानी और बिना किसी रोक-टोक के गलत फैसले लेने का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा। यह केवल एजुकेशन सिस्टम पर ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय समाज पर एक कलंक है। एग्जाम पेपर लीक होने पर आपको कैसे डॉक्टर-इंजीनियर मिलेंगे? नकल करके पास हुए ऐसे ही डॉक्टर आपके बच्चों का इलाज करेंगे और इंजीनियर आपकी बिल्डिंगे बनाएंगे, जो गिर जाएंगी और लोगों की जान जाएगी।
क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने आपसे सीधे या परोक्ष रूप से कोई संपर्क किया है?
अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। अब हम अपनी आवाज को और तेज करने की कोशिश करेंगे ताकि वह उन तक पहुंच पाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके लिए केवल सरकार ही नहीं देश वो लोग भी जिम्मेदार होंगे, जो इसे इतनी बुलंद करने में मदद नहीं कर सके कि इसे एक अहम मुद्दा माना जा सके।
क्या आप तब तक अपनी आवाज उठाने का इंतजार करेंगे जब तक आप अकेले न रह जाएं और कोई आपके साथ न खड़ा हो?
अगर लोग घरों से बाहर निकलकर अपनी आवाज उठाएं तो सरकार को झुकना पड़ेगा और उसके पास इस विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। हमें ऐसा लगता है कि सरकार इतनी असंवेदनशील भी नहीं है, वो एक-दो दिन में इस मुद्दे का समाधान तलाशने की कोशिश कर सकते हैं।
अगर आपको वार्ता के लिए बुलाया जाता है, तो क्या ऐसा हो सकता है कि आप सिर्फ इस्तीफे की जिद के बजाय, लंबे समय के सुधारों जैसे बड़े मुद्दों पर सहमत हो जाएं?
आज सही कदम उठाने के रास्ते खोलने की जरूरत है। इस्तीफा देना या जवाबदेही तय करना तो बस शुरुआत है। एजुकेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की रूपरेखा तैयार करने के लिए संसद के मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को इन युवाओं या मेरे जैसे शिक्षाविदों को शामिल करना चाहिए।
क्या आपको इससे कोई फर्क पड़ता है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला समर्थन जमीन पर नहीं दिख रहा है?
हर दिन 5 से 7 हजार लोग आ ही जाते हैं। बेशक यह संख्या हमारी अपेक्षा के अनुरूप न हो, लेकिन इतनी कम भी नहीं है कि चिंता की बात हो। लोगों को इस आंदोलन में एकजुटता दिखाने को एक दिन का उपवास रखना चाहिए।
क्या आपको लगता है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेता इस विरोध प्रदर्शन से जुड़ेंगे?
इस मंच का कोई राजनीतिक रंग नहीं है। सभी सियासी दलों के नेता इससे जुड़ेंगे मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो इससे सिर्फ उनकी छोटी सोच ही दिखेगी और जनता उन्हें नकार देगी।
CJP से जुड़ने से पहले क्या आपके मन में कोई डर था?
मुझे नहीं लगता कि वो ऐसा किसी निजी फायदे के लिए कर रहे हैं। मैंने इनसे जुड़ने से पहले उनके बारे में जानकारी जुटाई और उनसे बात भी की थी। लेकिन भविष्य में अगर कोई चाहे तो राजनीति में आ सकता है। इसके लिए सभी स्वतंत्र हैं।
PM मोदी को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
लोगों की बात सुनना सरकार के लंबे समय के फ़ायदे में है। उन्हें संवेदनशील होना चाहिए, न कि कठोर। लोकतंत्र सहानुभूति और करुणा से चलता है, कठोरता से नहीं। मैं उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला हूँ।

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