देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति के गठन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा...
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति के गठन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बिना समय बर्बाद किए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है।
परीक्षा सुधारों पर टास्क फोर्स बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए कदमों को देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। बेदी ने कहा कि नंदन नीलेकणि इस काम के लिए एक अत्यंत सम्मानित और विश्वसनीय व्यक्ति हैं, और हम उनसे राष्ट्रीय हित में बड़े एवं सकारात्मक बदलावों की उम्मीद करते हैं।
🏛️ 'युवाओं के प्रति संवेदनशील रहे नेतृत्व', किरण बेदी ने शिक्षा मंत्रालय को दी नई शुरुआत करने की सलाह
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय को एक नई और ऊर्जावान शुरुआत करनी चाहिए। यह एक ऐसा मौका है जिसे हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। मंत्रालय को उन सभी बिंदुओं की पहचान करनी चाहिए जिन्हें सही करने और बदलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लिए यह साफ संदेश है कि वे जनहित में बात सुनने और सुधार करने के लिए हमेशा तत्पर रहें। लोगों की जरूरतों और उम्मीदों को लेकर संवेदनशील रहने की आवश्यकता है, खासकर युवाओं के प्रति, क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी अभी आगे बाकी है। उन्होंने हर स्तर पर असरदार और संवेदनशील गवर्नेंस पर फोकस करने की बात कही।
🤝 'देश को रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत', संसद से व्यावहारिक समाधान की उम्मीद
किरण बेदी ने कहा कि अब पूरा देश संसद की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। आशा है कि संसद में होने वाली बहसें दलीय राजनीति से ऊपर उठकर व्यावहारिक समाधान प्रदान करेंगी।
हम ऐसी रणनीतियों को सुनने के लिए उत्सुक हैं जो समाज के सभी वर्गों में विश्वास का भाव जगाएं। इसके साथ ही, मौजूदा सरकार के सामने मौजूद अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करना होगा। इस समय देश को रचनात्मक और दूरदर्शी नेतृत्व की जरूरत है।
🛡️ छात्र प्रदर्शनों से निपटने के लिए पीएम और गृह मंत्री को सुझाव, 'सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को करें तैनात'
इससे पहले बेदी ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को एक महत्वपूर्ण सलाह दी थी। बेदी ने सुझाव दिया था कि छात्रों के प्रदर्शनों को संभालने के लिए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को तैनात किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स सुरक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य कर सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे सीमा पर बीएसएफ तैनात रहती है। सुरक्षात्मक उपायों के साथ, बिना लाठी-डंडे के इन वॉलंटियर्स को छात्र प्रदर्शनकारियों का सामना करना चाहिए। वहीं, दंगा-रोधी पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान न हो।
👮♀️ 'राज्यों के पास मौजूद हैं होम गार्ड्स', केवल आवश्यकता पड़ने पर ही दंगा-रोधी पुलिस करे कार्रवाई
दिल्ली में लंबा प्रशासनिक अनुभव रख चुकीं बेदी ने कहा कि हर राज्य में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स या होम गार्ड्स उपलब्ध होते हैं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से पैदा होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए उनके जवानों को बेहतर और विशेष प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दंगा-रोधी पुलिस को तभी मैदान में उतरना चाहिए जब सिविल डिफेंस की अग्रिम पंक्ति टूट रही हो या उस पर कोई प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न हो गया हो।

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