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गुरुग्राम भूमि घोटाला: ED की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में, DLF की भूमिका की जांच

  गुरुग्राम में शिकोहपुर के जिस भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रॉबर्ट वाड्रा का नाम आया था, उसे लेकर ईडी (प्रवर्तन निदेशाल...

 


गुरुग्राम में शिकोहपुर के जिस भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रॉबर्ट वाड्रा का नाम आया था, उसे लेकर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने शुक्रवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। जिसमें ​​एजेंसी ने बताया कि मामले में DLF की भूमिका की जांच की जा रही है। रॉबर्ट वाड्रा इस मामले के अन्य आरोपियों में से एक हैं। उन्हें 16 मई को जमानत मिल गई थी। इससे पहले, कोर्ट ने ED की चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए 16 अप्रैल को रॉबर्ट वाड्रा और अन्य लोगों को समन जारी किया था।

ED ने स्पेशल जज सुशांत चांगोत्रा ​​के सामने सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि DLF की भूमिका के संबंध में आगे की जांच की जा रही है। इस दौरान आरोपी के वकील ने भी अदालत से अपने लिए स्टेटस रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी। हालांकि ED के वकील नवीन कुमार मट्टा ने इस अनुरोध का विरोध किया और कहा कि वह इस बिंदु पर उचित निर्देश लेंगे। ऐसे में कोर्ट ने निर्देश दिया कि तब तक स्टेटस रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा।

वाड्रा के वकील ने मांगी अनुवादित कॉपी

सुनवाई के दौरान, वाड्रा के वकील ने गुजराती भाषा में दी गई सेल डीड की अनुवादित कॉपी उपलब्ध कराने के लिए एक आवेदन दाखिल किया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) के साथ उक्त सेल डीड की अनुवादित कॉपी भी दाखिल नहीं की गई है। जिसके बाद ED के वकील ने कहा कि उक्त सेल डीड की अनुवादित कॉपी सुनवाई की अगली तारीख पर दाखिल की जाएगी। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट में एक विशिष्ट सवाल का जवाब न दिए जाने पर भी नाराजगी जताई।

विशिष्ट सवाल का जवाब न दिए जाने पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने कहा कि 15 अप्रैल को रॉबर्ट वाड्रा के वकील द्वारा अपनाए गए तर्क के संबंध में एक विशिष्ट सवाल पूछा गया था। स्टेटस रिपोर्ट में अभी तक उस सवाल का स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दिया गया है। कोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि वह अगली स्टेटस रिपोर्ट में जानकारी/स्पष्टीकरण दे। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अगली स्टेटस रिपोर्ट संबंधित ED के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा भेजी जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी। यह मामला चार्जशीट के साथ जमा किए गए दस्तावेजों की जांच के चरण में है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2008 के एक भूमि सौदे से संबंधित है, जिसमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी' ने ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। आरोपों के अनुसार यह खरीदी एक धोखाधड़ी वाले सेल डीड (बिक्री विलेख) के जरिए की गई थी, जिसमें सेल डीड के रजिस्ट्रेशन के समय बिक्री की असल रकम का भुगतान नहीं किया गया था। यह लेनदेन हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था। ईडी की जांच इन आरोपों पर केंद्रित है कि हुड्डा प्रशासन ने वाड्रा की कंपनी को कमर्शियल लाइसेंस प्रदान कर भारी वित्तीय लाभ पहुंचाया, जिससे जमीन की कीमत कई गुना बढ़ गई।

वाड्रा के जमीन खरीदते ही जारी किया गया कमर्शियल कॉलोनी का लाइसेंस

जांच से पता चलता है कि शुरुआती खरीद के तुरंत बाद राज्य सरकार ने उस भूखंड पर कमर्शियल कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस जारी कर दिया था। खबरों के मुताबिक, कुछ ही महीनों के भीतर 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी' ने वही जमीन रियल एस्टेट दिग्गज डीएलएफ को 58 करोड़ रुपए में बेच दी। इस तरह महज छह महीने से भी कम समय में मूल कीमत से 700 प्रतिशत से भी अधिक के उछाल के साथ 50 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया गया।

ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज को बताया मुखौटा कंपनी

ईडी ने 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज' की वैधता पर संदेह जताया है और आरोप लगाया है कि इसने एक 'फ्रंट' (मुखौटा कंपनी) के रूप में काम किया होगा। साथ ही, यह भी नोट किया गया है कि जमीन की खरीद के लिए दिया गया, मूल चेक कथित तौर पर कभी भुनाया ही नहीं गया था। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी इस मामले में आरोपी हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने वाड्रा की फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।

जांच में इन सौदों का संबंध वजीराबाद में डीएलएफ को 350 एकड़ जमीन के आवंटन से भी जोड़ा गया है, जिससे कथित तौर पर डेवलपर को 5,000 करोड़ रुपए का भारी मुनाफा हुआ था। यह विवाद पहली बार 2012 में तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने लाइसेंस प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं का हवाला देते हुए जमीन का दाखिल-खारिज रद्द कर दिया था।








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