गाजियाबाद में चलती कार को ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर बनाकर भ्रूण लिंग जांच करने वाले गैंग का नगर कोतवाली पुलिस और सिटी जोन स्वाट टीम ने पर...
गाजियाबाद में चलती कार को ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर बनाकर भ्रूण लिंग जांच करने वाले गैंग का नगर कोतवाली पुलिस और सिटी जोन स्वाट टीम ने पर्दाफाश किया है। शनिवार देर रात महामाया स्टेडियम फ्लाईओवर के पास चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, जांच में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण और 20 हजार रुपये नकद बरामद हुए।
एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि अवैध भ्रूण लिंग जांच की सूचना मिलने पर डॉक्टर, राजस्व विभाग और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई। देर रात महामाया स्टेडियम फ्लाइओवर के पास एक संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली गई। कार के भीतर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, जेल, मेडिकल उपकरण और अन्य सामान मिला।
मौके से चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मूलरूप से थाना चांदीनगर जिला बागपत के गांव गढ़ी कलंजरी निवासी संदीप, थाना स्याना जिला बुलंदशहर के गांव खानपुर निवासी तस्लीम उर्फ साहिल राणा, थाना गढ़मुक्तेश्वर जिला हापुड़ के गांव सरूरपुर निवासी सलमान और नंदग्राम थानाक्षेत्र के गांव नूरनगर निवासी शाहिद अहमद के रूप में हुई। पीसीपीएनडीटी ऐक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया गया
सरगना पहले भी जेल जा चुका
एसीपी के मुताबिक, गिरोह का संचालन संदीप कर रहा था। सलमान पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने का काम करता था, जबकि तस्लीम और शाहिद ऐसे महिलाओं की तलाश करते थे जो भ्रूण लिंग जांच कराना चाहती थी। दोनों वॉट्सऐप के माध्यम से संपर्क कर रात के समय तय स्थान पर महिलाओं को बुलाते थे। कार में ही जांच की जाती थी और तुरंत परिणाम भी बता दिया जाता था। एसीपी ने बताया कि संदीप पहले भी टीला मोड़ क्षेत्र में अवैध भ्रूण लिंग जांच के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने फिर से यह काम शुरू कर दिया।
15 हजार रुपये वसूलते थे
एसीपी ने बताया कि गिरोह केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं था। आरोपी दिल्ली, नोएडा और एनसीआर के अन्य शहरों में भी कार से घूमकर भ्रूण लिंग जांच करते थे। अस्पतालों के आसपास वाहन खड़ा कर महिलाओं को बुलाया जाता था। पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद से कार के भीतर ही जांच पूरी कर दी जाती थी। भ्रूण का लिंग बताने के एवज में आरोपी 10 से 15 हजार रुपये वसूलते थे।
गर्भपात भी कराते थे आरोपी
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि यदि किसी महिला को भ्रूण का लिंग जानने के बाद गर्भपात कराना होता था तो वह झोलाछाप डॉक्टरों के माध्यम से 20 से 30 हजार रुपये लेकर गर्भपात भी कराते थे। एसीपी का कहना है कि पुलिस अब गिरोह से जुड़े डॉक्टरों और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गई है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए भी कार्रवाई जारी है।
पहले के मामले
● मई 2026: हरियाणा की पीसीपीएनडीटी टीम ने चलती एसयूवी के अंदर पोर्टेबल उपकरणों का उपयोग कर भ्रूण लिंग परीक्षण करने का भंडाफोड़ किया । इसमें लोनी क्षेत्र से दो लोगों को गिरफ्तार किया।
● जुलाई 2024: पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के आसपास कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से जांच करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया गया।
● जुलाई 2024: लाल कुआं के पास एक 42 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया गया। जो कार या वैन के अंदर अवैध रूप से जांच करती थी।

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