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Dharmendra Pradhan Resignation: नए शिक्षा मंत्री से क्या चाहते हैं छात्र? CJP प्रदर्शनकारियों ने रखीं 3 बड़ी मांगें

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय से हटने के बाद शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन में शामिल कई...


 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय से हटने के बाद शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने प्रतिक्रिया दी। छात्रों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब नए मंत्री आकर शिक्षा प्रणाली में ठोस और व्यावहारिक बदलाव लाएंगे।

छात्रों की कई मांगों में से तीन प्रमुख मांगें बार-बार सामने आईं। इनमें प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, और सरकारी स्कूलों व प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।

🏛️ 'सिस्टम की कमियों को दूर करना जरूरी': गाजियाबाद और दिल्ली के युवाओं ने रखीं अपनी समस्याएं

गाजियाबाद के रहने वाले राज यादव, जो लगभग एक महीने पहले शुरू हुए CJP के विरोध-प्रदर्शन का लगातार हिस्सा रहे हैं, उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर बड़े सुधार करने चाहिए। उनकी मांग है कि नए शिक्षा मंत्री पूरे सिस्टम की खामियों को दूर करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रशासनिक ढांचा ठीक से काम करे।

वहीं, दिल्ली के लक्ष्मी नगर की रहने वाली छात्र प्रतिनिधि सृष्टि ने कहा कि शिक्षा की लगातार बढ़ती लागत के कारण कई छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना एक बड़ा संघर्ष बन गया है। उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें साथ में काम करना पड़ता है, और ऐसे में जब पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो इसके गंभीर परिणाम युवाओं को भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने नए मंत्री से सभी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, सस्ती शिक्षा और सरकारी स्कूलों में कौशल विकास (Skill Development) पर जोर देने की अपील की।

📚 'शिक्षा व्यापार नहीं, हर बच्चे का अधिकार है': प्राथमिक स्तर से सुधार की उठी मांग

राजस्थान के विक्रम चौधरी, जो पिछले दो हफ्तों से आंदोलन में डटे हुए थे, उन्होंने मांग की कि सुधारों की शुरुआत सीधे प्राथमिक स्कूल स्तर से होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, राष्ट्रीय शिक्षा बजट बढ़ाने और UPSC, NEET व JEE जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में शिक्षा का लगातार व्यवसायीकरण हो रहा है, जिस पर सरकार को तुरंत अंकुश लगाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा कोई कारोबार नहीं है, यह हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और उन्हें यह हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और सरकारी परिसरों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की वकालत की।

📝 'उम्मीद अभी बाकी है': नीट अभ्यर्थियों ने दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों और री-एग्जाम से मुक्ति की उठाई आवाज

NEET की तैयारी कर रहे 11वीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन्हें उम्मीद जगी है कि छात्र शक्ति के आगे सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने खुशी जताई कि छात्रों की आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची है और भरोसा जताया कि नए शिक्षा मंत्री पेपर लीक जैसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे।

राजस्थान के जैसलमेर से आए श्रवण कुमार ने एक अन्य व्यावहारिक समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि छात्रों को बार-बार दोबारा परीक्षा (Re-exam) देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को उनके गृह जिलों से दूर-दराज के इलाकों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।








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