नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की चुनाव संबंधी कार्यों में ड्यूटी लगाने का सं...
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की चुनाव संबंधी कार्यों में ड्यूटी लगाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि, यह भी सुनिश्चित करना आयोग की ही जिम्मेदारी है कि इससे शिक्षकों पर असहनीय मानसिक और शारीरिक दबाव न पड़े।
चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बड़े पैमाने पर बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और गणना कर्मी के रूप में तैनात किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
🏫 'स्कूल समय समाप्त होने के बाद करते हैं काम': चुनाव आयोग ने हलफनामे में दी व्यवस्थाओं की जानकारी
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने पीठ को बताया कि उसने मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल कर दिया है और हाई कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। आयोग के अनुसार, किसी भी शिक्षक से स्कूल के शिक्षण समय के दौरान चुनाव संबंधी कार्य नहीं कराया जा रहा है।
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि शिक्षक स्कूल समय समाप्त होने के बाद बूथ स्तरीय अधिकारी का काम करते हैं। इसके अलावा, इस अभियान में स्वयंसेवकों की भी तैनाती की गई है ताकि नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।
📜 '6-8 घंटे पढ़ाने के बाद 5 घंटे चुनावी ड्यूटी अनुचित': हाईकोर्ट ने महिला शिक्षकों के कार्यभार पर जताई चिंता
पीठ ने चुनाव आयोग के इस तर्क पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षकों के कार्यभार का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। पीठ ने कहा कि यदि कोई शिक्षक 6 से 8 घंटे तक स्कूल में पढ़ाने के बाद 5 घंटे चुनावी ड्यूटी भी करता है, तो कुल 11 घंटे काम लेना किसी भी तरह से उचित नहीं है। पीठ ने विशेष रूप से महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया।
इसके अलावा, कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के एक परिपत्र की भाषा पर भी सवाल उठाया। पीठ ने पूछा कि यदि शिक्षकों से केवल स्कूल समय के बाद काम कराया जा रहा है, तो फिर प्रधानाचार्यों को यह निर्देश देने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि चुनावी ड्यूटी के कारण शिक्षकों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए।
📂 याचिकाकर्ता का दावा- '10 हजार शिक्षकों को बाद में भेजा स्कूल': मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग के दावों का कड़ा विरोध करते हुए उन्हें गलत बताया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जनहित याचिका दायर होने के बाद ही लगभग 10 हजार शिक्षकों को दोबारा स्कूल भेजने के आदेश जारी किए गए, जो इस बात को स्वीकार करता है कि पहले नियमों का उल्लंघन हो रहा था। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि शिक्षकों को प्रधानाचार्यों और चुनाव अधिकारियों से अलग-अलग निर्देश मिल रहे हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता आयोग के आंकड़ों से असहमत हैं, तो वे साक्ष्य समेत अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करें। इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की गई है।

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