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CJP Protest: दिल्ली संसद मार्च में घायल 21 वर्षीय युवती RML अस्पताल से डिस्चार्ज, 10 दिन बाद मिली छुट्टी

  नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई 21 वर्षीय युवती को दिल्ली के डॉ. राम मनोह...


 नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई 21 वर्षीय युवती को दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। युवती का बीते 10 दिनों से अस्पताल में गहन इलाज चल रहा था।

अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शन के दौरान चोटिल हुई युवती की सेहत में अब अभूतपूर्व सुधार है। भर्ती के समय स्थिति नाजुक होने के कारण उन्हें सबसे पहले इमरजेंसी और फिर आईसीयू (ICU) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। करीब एक हफ्ते तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद जब हालत में सुधार हुआ, तो उन्हें नर्सिंग होम वार्ड में शिफ्ट किया गया। इलाज के 10वें दिन मरीज पूरी तरह होश में हैं, सामान्य भोजन ले रही हैं और दैनिक दिनचर्या के कार्य खुद करने में सक्षम हैं।

❌ सोशल मीडिया पर फैल गई थी मौत की अफवाह: दिल्ली पुलिस ने नोटिस जारी कर दी थी सफाई

प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैलने लगी थी कि घायल युवती की मौत हो चुकी है। इन भ्रामक दावों का खंडन करते हुए दिल्ली पुलिस ने 23 जुलाई को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट की थी।

पुलिस ने बताया था कि जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारी की मृत्यु की खबर पूरी तरह से बेबुनियाद है। पुलिस ने डॉक्टरों के हवाले से जानकारी दी थी कि युवती जीवित है, उसका RML अस्पताल में इलाज जारी है और उसकी हालत पूरी तरह से स्थिर तथा खतरे से बाहर है।

🚨 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुआ था लाठीचार्ज: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था 36 दिनों का आंदोलन

उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में एकत्र हुए सीजेपी कार्यकर्ता संसद मार्च के तहत आगे बढ़ रहे थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, जिनमें से गंभीर रूप से चोटिल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता 20 जून से जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। आंदोलन के 36वें दिन धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद ही प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से अपना धरना समाप्त किया था।







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