नई दिल्ली: देश की पहली महिला आईपीएस (IPS) अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने मांग की है कि जंतर-मंतर को 'धरना-प्रदर्श...
नई दिल्ली: देश की पहली महिला आईपीएस (IPS) अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने मांग की है कि जंतर-मंतर को 'धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का स्थान' नहीं रहने देना चाहिए। बेदी का तर्क है कि जंतर-मंतर से संसद भवन बेहद नजदीक है और वहां होने वाले प्रदर्शनों का सीधा असर आसपास के बाजारों पर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जंतर-मंतर की बजाय दिल्ली में धरना-प्रदर्शन का मुख्य स्थल रामलीला मैदान को बनाया जाना चाहिए।
हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुए टकराव और पैलेट गन चलने की नौबत को किरण बेदी ने प्रशासनिक सिस्टम की बड़ी चूक बताया। एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों के सामने सीधे सशस्त्र बलों (Armed Forces) को तैनात करने को औपनिवेशिक मानसिकता वाली ब्रिटिश व्यवस्था करार दिया और इसमें बदलाव के कई सुझाव दिए।
🛡️ 'सशस्त्र बल सीधे लाना सिस्टम की बड़ी गलती': किरण बेदी ने बताया 3-लेयर 'लाइन ऑफ डिफेंस' का फॉर्मूला
किरण बेदी ने 20 जुलाई को 'संसद चलो मार्च' के दौरान पैदा हुई स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, "समस्या यह है कि छात्र आंदोलन सीधे तौर पर सशस्त्र बलों के साथ टकराव में क्यों आया? यह हमारे सिस्टम की कमी है। हम अभी भी ब्रिटिश कालीन व्यवस्था चला रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। छात्र आंदोलन से निपटने के लिए पहली 'लाइन ऑफ डिफेंस' सिविल पुलिस या सिविल डिफेंस होनी चाहिए, हमने उनका इस्तेमाल क्यों नहीं किया?"
प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने तीन-स्तरीय (3-Layered) सुरक्षा व्यवस्था का सुझाव दिया:
पहली पंक्ति (Civil Defence): गैर-कानूनी जमावड़े से निपटने के लिए सबसे आगे बिना लाठी वाले सिविल डिफेंस के जवानों को रखना चाहिए।
दूसरी पंक्ति (Female Police): बैरिकेड्स टूटने पर दूसरी पंक्ति में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाए, जिनके पास लाठियां न हों, लेकिन सुरक्षा के लिए हेड गियर और बॉडी आर्मर हो।
तीसरी पंक्ति (Armed Forces & Water Cannon): यदि भीड़ पूरी तरह बेकाबू होती है, तभी तीसरी पंक्ति में सशस्त्र बलों को आना चाहिए। वॉटर कैनन का प्रयोग अंतिम चरण में हो और ड्रोन व कैमरों से असामाजिक तत्वों की निगरानी की जाए।
🏛️ संसद की सुरक्षा और कनॉट प्लेस के व्यापार का तर्क: जानें क्यों जंतर-मंतर को शिफ्ट करने की उठी मांग
जंतर-मंतर से धरना स्थल हटाने की वजह बताते हुए किरण बेदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देकर हम प्रदर्शनकारियों को सीधे संसद भवन का रास्ता दिखाते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर एक बेहद छोटा स्थान है जो कनॉट प्लेस के मुख्य बाजारों के बिल्कुल सामने है। वहां उग्र आंदोलन होने पर दुकानें जल्दी बंद करनी पड़ती हैं, जिससे व्यापारियों का कारोबार ठप हो जाता है और लूटपाट की आशंका भी बनी रहती है।
सोशल मीडिया पर अपनी बात को दोहराते हुए बेदी ने कहा कि रामलीला मैदान में पर्याप्त स्थान है और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन की व्यवस्था आसानी से की जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद भवन की सुरक्षा और कनॉट प्लेस के व्यापार को उपद्रव से बचाना है।

कोई टिप्पणी नहीं