समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने गुरुवार को पिछले 19 दिन से जंतर-मंतर पर अनिश्चि...
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने गुरुवार को पिछले 19 दिन से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान डिंपल ने कुछ देर सोनम से बात कर उनका हाल चाल जाना। इस दौरान डिंपल ने मंच से ही सरकार पर जमकर हमला बोला और अलग-अलग मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। सपा सांसद ने इस दौरान उत्तर प्रदेश में होने वाले विधासनभा चुनाव में बीजेपी को रोकने का तरीका भी बताया।
जंतर-मंतर पहुंची डिंपल ने कहा कि 'मैंसोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को सलाम करती हूं। कई छात्रों की तबीयत खराब हुई है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने युवाओं को एक मंच दिया है। हमारा युवा अगर मजबूत हो जाए तो उन्हें कोई नहीं हरा सकता। पूरी समाजवादी पार्टी का समर्थन है। छात्र और किसान की हालत देश में सबको पता है। देश में डर का माहौल बनाया जा रहा है।'
डिंपल ने आगे कहा ‘सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है कौन जी रहा है या कौन मर रहा है। इतनी कठोर सरकार देश में कभी नहीं आई है। यूपी में भाजपा को रोकना है तो वोट के जरिए रोका जा सकता है। यह लोग जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती हैं।'
डिंपल यादन ने वांगचुक से कहा कि यह लोग गांधी के आदर्श को नहीं मानते हैं। केवल राम के नाम का प्रयोग करके सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
कांग्रेस ने अबतक बनाई दूरी
सपा सांसद का यह दौरा सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति विपक्षी एकजुटता और समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। भूख हड़ताल के 19 दिन बाद सोनम वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट गया है। हाल में आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। हालांकि कांग्रेस ने अबतक आंदोलन से दूरी बनाई हुई है। कॉकरोच जनता पार्टी उम्मीद कर रही है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दें।
प्रिया सरोज भी मिल चुकीं
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज बुधवार को जंतर-मंतर पहुंची थीं। वांगचुक और दीपके से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा ' कॉकरोच जनता पार्टी यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उन लाखों नाराज और निराश युवाओं की आवाज है, जो लगातार हो रहे पेपर लीक, अटकी भर्तियों और अपने भविष्य के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्वक संघर्ष कर रहे हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोग सदियों में एक बार पैदा होते हैं। यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि सही और गलत की है। यह जवाबदेही की लड़ाई है। किसी देश की सबसे बड़ी संपत्ति उसका खजाना नहीं, उसका युवा होता है। और जब युवा रोने लगे, तो समझ लीजिए देश बीमार है। एक बेहतर भारत के लिए, इस आवाज को देश के हर युवा, हर माता-पिता और हर जागरूक नागरिक के समर्थन की जरूरत है।एक बेहतर भारत के लिए, इस आवाज को देश के हर युवा, हर माता-पिता और हर जागरूक नागरिक के समर्थन की जरूरत है।'

कोई टिप्पणी नहीं