Page Nav

HIDE

Breaking News:

latest

Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, सीजेपी ने बताया 'अधूरा कदम'

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुआई में दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार...



नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुआई में दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को लोकसभा से 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पारित करा लिया।

सख्त सजा और भारी जुर्माने के प्रावधान वाले इस विधेयक के पारित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में इसे 'अधूरा कदम' करार दिया है। सीजेपी का कहना है कि सरकार ने केवल पेपर लीक हो जाने के बाद उठाए जाने वाले दंडात्मक कदमों पर ध्यान केंद्रित किया है, जबकि पहली प्राथमिकता पेपर लीक को रोकने वाले ठोस उपायों पर होनी चाहिए।

🎙️ CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका की मांग: 'NTA रिफॉर्म, SSC को वैधानिक दर्जा और वेंडर चेकिंग के बिना हल नहीं होगी समस्या'

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जब तक पेपर लीक रोकने के लिए बुनियादी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा, "आज जो संशोधन बिल पास हुआ है, उसमें फिर वही कमी है जिसकी हम लगातार बात करते रहे हैं। सरकार पेपर लीक होने के बाद की व्यवस्थाओं—जैसे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सख्त सजा या जुर्माने—पर तो बात कर रही है, लेकिन पेपर लीक रोकने के उपायों का कोई जिक्र नहीं है।"

रांका ने आगे कहा, "जब तक NTA में रिफॉर्म नहीं होंगे, SSC को वैधानिक निकाय नहीं बनाया जाएगा, एग्जाम कैलेंडर और सिलेबस में पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, कोचिंग सेंटरों व वेंडरों पर नकेल नहीं कसी जाएगी, ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों को रोका नहीं जाएगा और डिजिटल व फिजिकल ऑडिट के जरिए पूरे ढांचे को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी।" उन्होंने सरकार को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय सभी शिक्षा विशेषज्ञों से सलाह लेकर कदम उठाने का सुझाव दिया।

⚖️ हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हुआ बिल: जानें कानून में 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने के प्रावधान

लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के बीच यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया।

संशोधन विधेयक 2026 के मुख्य प्रावधान:

  • सजा और जुर्माना: परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर 5 से 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।

  • संगठित अपराध पर शिकंजा: संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए कम से कम 7 साल के कारावास और ₹10 करोड़ तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव है।

  • समयबद्ध जांच व सुनवाई: सभी जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश दिया गया है, जो चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने में ट्रायल पूरा करेंगी।

🛠️ नंदन नीलेकणि की अगुआई में बनी टास्क फोर्स: 36 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा कदम

परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुआई में 6 विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है।

उल्लेखनीय है कि सीजेपी के नेतृत्व में चला 36 दिनों का व्यापक छात्र आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के बाद समाप्त हुआ था, जिसके ठीक एक दिन बाद परीक्षा सुधारों के लिए इस टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गई थी।







 

कोई टिप्पणी नहीं