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Ankit Sharma Murder Case: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, पढ़ें 2020 दिल्ली दंगे के आईबी अफसर हत्याकांड का पूरा सच

नई दिल्ली: साल 2020, तारीख 25 फरवरी और हिंसा की आग में जलती दिल्ली। यह वो तारीख है जब खुफिया ब्यूरो (IB) के एक जांबाज अफसर घर से निकलते हैं...


नई दिल्ली: साल 2020, तारीख 25 फरवरी और हिंसा की आग में जलती दिल्ली। यह वो तारीख है जब खुफिया ब्यूरो (IB) के एक जांबाज अफसर घर से निकलते हैं और फिर कभी जिंदा वापस नहीं लौटते। अगले दिन नाले में उनका शव मिलता है, जिस पर चोट के 50 से ज्यादा निशान और धारदार हथियारों के गहरे घाव थे।

शव की शिनाख्त आईबी अफसर अंकित शर्मा के रूप में हुई। हमलावरों के उन्माद ने देश से उसका लाल और एक परिवार से उनका बेटा छीन लिया। लगभग 6 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब इस बहुचर्चित केस में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, अदनान, जावेद, नाजिम और कासिम को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले पर ताहिर हुसैन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "मैच फिक्स था, देर है अंधेर नहीं, इंसाफ हाईकोर्ट से मिलेगा।"

🔍 जांच में ताहिर हुसैन का नाम कैसे आया: चांद बाग हिंसा से ताहिर के मकान का कनेक्शन

25 फरवरी 2020 को दिल्ली का चांद बाग और आसपास का इलाका दंगे की चपेट में था। इसी दौरान अंकित शर्मा घर से निकले थे। जब वह वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने तलाश शुरू की। अगले दिन नाले से बरामद शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हत्या की नृशंसता बयां की।

पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की, तो कई लोगों ने ताहिर हुसैन के मकान का प्रमुखता से जिक्र किया। अंकित शर्मा के पिता ने भी अपनी पुलिस शिकायत में ताहिर और उसके साथियों पर सीधा संदेह जताया। जांच में सामने आया कि दंगे के दौरान ताहिर के घर की छत का इस्तेमाल पथराव और पेट्रोल बम फेंकने के लिए किया जा रहा था, जिसके बाद जांच की दिशा पूरी तरह उस इमारत की तरफ मुड़ गई।

⚖️ इन मजबूत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद: चश्मदीदों से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तक

ताहिर हुसैन जिस फैसले पर सवाल उठा रहा है, वह किसी एक गवाह पर नहीं बल्कि मजबूत पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला पर आधारित है:

  • चश्मदीद गवाहों के बयान: कई प्रत्यक्षदर्शियों ने अदालत में गवाही दी कि दंगों के दौरान ताहिर के घर में भारी भीड़ जमा थी और वहीं से उपद्रव को भड़काया जा रहा था।

  • कॉल डिटेल और लोकेशन: जांच एजेंसियों द्वारा खंगाली गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन से साफ हुआ कि वारदात के समय ताहिर घटनास्थल के पास ही मौजूद था और अन्य सह-आरोपियों के लगातार संपर्क में था।

  • डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण कर घटना की पूरी टाइमलाइन तैयार की।

  • साजिश की चार्जशीट: पुलिस ने अदालत में साबित किया कि अंकित शर्मा को सुनियोजित साजिश के तहत निशाना बनाया गया था। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को नाले में फेंका गया।

🏛️ 'जानवरों की तरह मारा गया...': अदालत की तल्ख टिप्पणी के साथ सजा का ऐलान

कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि "अंकित शर्मा को जानवरों की तरह बेरहमी से मारा गया और हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया।"

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सभी सबूत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और इन्हें समग्र रूप से देखने पर अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है। इसी आधार पर कोर्ट ने ताहिर हुसैन और उसके सहयोगियों को हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने और अन्य संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई।






 

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