सुगौली ( पूर्वी चंपारण ), 23 मार्च 2026 : बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ते जल संकट के बीच बाढ़ नियंत्रण, भूमि कटाव रोकने, भूजल स्तर सुधारने त...

सुगौली ( पूर्वी चंपारण ), 23 मार्च 2026 : बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ते जल संकट के बीच बाढ़ नियंत्रण, भूमि कटाव रोकने, भूजल स्तर सुधारने तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को एक साथ जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल सामने आया है। “रोड कम इरिगेशन सिस्टम” नामक इस अवधारणा को नवप्रवर्तक डॉ. प्रमोद स्टीफन ने विकसित किया है, जिसका उद्देश्य जल प्रबंधन की पारंपरिक प्रणालियों की कमियों को दूर करते हुए एक स्थायी और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करना है।
इस प्रस्तावित प्रणाली में सड़कों के साथ विशेष प्रकार की नहरों या पाइपलाइन संरचना विकसित करने की बात कही गई है, जिसके माध्यम से वर्षा जल और नदी जल को नियंत्रित तरीके से प्रवाहित किया जा सके। वर्तमान में बड़े बांधों में अधिक वर्षा के दौरान ओवरफ्लो की स्थिति बनती है, जिससे अचानक जल छोड़े जाने पर बाढ़ और भूमि कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके विपरीत इस नई प्रणाली में जल प्रवाह को संतुलित और चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाएगा, जिससे बाढ़ की तीव्रता को कम किया जा सकेगा।
इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री जैसे चूना, ईंट चूर्ण और उड़द दाल आधारित मिश्रण के उपयोग का सुझाव दिया गया है। यह संरचना जल के सूक्ष्म रिसाव को संभव बनाती है, जिससे आसपास की भूमि में नमी बनी रहती है और भूजल का प्राकृतिक पुनर्भरण होता है। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली के माध्यम से जल प्रवाह का उपयोग कर लघु स्तर पर जलविद्युत उत्पादन की भी परिकल्पना की गई है। नियंत्रित जल प्रवाह और ऊंचाई के अंतर का उपयोग कर ऊर्जा उत्पन्न कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती है।
डॉ. प्रमोद स्टीफन का मानना है कि यह मॉडल केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास की दिशा में एक समग्र पहल है। उन्होंने कहा कि यदि इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया जाए, तो यह बाढ़ और जल संकट जैसी समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।





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