‘अगर किश्ती डूबी तो डूबोगे सारे’ के जरिए समाज को चेतावनी जातिवाद के खिलाफ वैचारिक संघर्ष की प्रेरणा देती संतराम बी.ए. की रचनाएँ संतराम ब...
‘अगर किश्ती डूबी तो डूबोगे सारे’ के जरिए समाज को चेतावनी
जातिवाद के खिलाफ वैचारिक संघर्ष की प्रेरणा देती संतराम बी.ए. की रचनाएँ
संतराम बी.ए. के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे बालकृष्ण प्रजापति
नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026 : आज के दौर में जब समाज वैचारिक और जातिगत आधार पर बंटा हुआ दिखाई देता है, ऐसे समय में प्रजापति संतराम बी.ए. जैसे महान समाज सुधारक के विचार और उनकी रचनाएं फिर से प्रासंगिक हो उठी हैं। उनकी चर्चित पुस्तक “अगर किश्ती डूबी तो डूबोगे सारे” केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि समाज को आत्ममंथन करने के लिए दिया गया एक गंभीर संदेश है। यह पुस्तक समाज में फैले भेदभाव, असमानता और जातिवाद के खिलाफ वैचारिक संघर्ष की प्रेरणा देती है।
यह पुस्तक संतराम बी.ए. द्वारा लिखे गए उन लेखों का संकलन है, जिनमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि समाज का एक हिस्सा भी अन्याय और शोषण का शिकार है, तो पूरा समाज सुरक्षित नहीं रह सकता। लेखक ने सामूहिक जिम्मेदारी, सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों को समाज की प्रगति का आधार बताया है। उन्होंने तर्क दिया है कि जातिगत श्रेष्ठता का भाव देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है।
संतराम बी.ए. न केवल अपने लेखन बल्कि अपने जीवन से भी सामाजिक समानता की मिसाल पेश करते रहे। उन्होंने अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा दिया और अपने पुत्र-पुत्री का विवाह अंतर्जातीय कर समाज के सामने उदाहरण रखा। उनके विचारों को आज बालकृष्ण प्रजापति नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, जिससे युवाओं में सामाजिक चेतना विकसित हो रही है।
पुस्तक यह संदेश देती है कि समाज की भलाई आपसी एकता, तर्कशील सोच और मानवता के मूल्यों को अपनाने से ही संभव है। “अगर किश्ती डूबी तो डूबोगे सारे” आज के युवाओं के लिए एक जरूरी पाठ है, जो उन्हें जातिवाद के खिलाफ खड़े होने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
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