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मुंबई में देश का पहला अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित होगा

नई दिल्ली, 06 फरवरी 2026 : भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती देने क...

नई दिल्ली, 06 फरवरी 2026 : भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) के अरविंद मेहता टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर (एएमटीईसी) और ऑस्ट्रिया की विश्व प्रसिद्ध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मशीनरी कंपनी ईआरईएमए के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के तहत मुंबई में देश का पहला अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा।
एएमटीईसी के चेयरमैन अरविंद मेहता ने कहा कि वर्तमान समय में भारत का रीसाइक्लिंग उद्योग शिक्षित और कुशल मानव संसाधन की भारी कमी से जूझ रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक मशीनों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, ताकि वे सीधे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें। उन्होंने बताया कि यह केंद्र एक सिस्टमैटिक स्कूल की तरह कार्य करेगा, जहां छात्रों को कच्चे माल, स्क्रैप प्रोसेसिंग, पॉलीमर पहचान और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की पूरी जानकारी दी जाएगी।
समझौते के तहत इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के लिए 75 घंटे का विशेष संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। ईआरईएमए कंपनी केंद्र को 50 से 100 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता की अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग मशीन नि:शुल्क उपलब्ध कराएगी, जिससे छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग मिल सकेगी। एआईपीएमए अध्यक्ष सुनील शाह ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे और कई डोनर्स सीएसआर फंड के माध्यम से इस पहल में सहयोग कर रहे हैं। यह केंद्र न केवल उद्योग और शिक्षा के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के जरिए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों को भी मजबूती देगा।
यह पहल प्रधानमंत्री के स्किल इंडिया मिशन और सर्कुलर इकोनॉमी विजन से प्रेरित मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केंद्र से प्रशिक्षित छात्र भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

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