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Sonia Gandhi Voter List Controversy Updates: क्या है सोनिया गांधी की नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़ा यह पूरा कानूनी विवाद?

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वोटर लिस्ट मामले में कांग्रेस पार्टी की शीर्ष नेत्री सोनिया गांधी के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका को औपचारिक...

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वोटर लिस्ट मामले में कांग्रेस पार्टी की शीर्ष नेत्री सोनिया गांधी के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। मामले से जुड़ी एक शिकायत पर राउज एवेन्यू कोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू कर दी गई है। अदालत ने शिकायतकर्ता को इस मामले में अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति भी दे दी है। आरोप लगाया गया है कि भारत की नागरिकता मिलने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) विनोद जोशी की अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है।

📄 शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी की मांग; 1980 की मतदाता सूची और 1983 की नागरिकता का है मामला

याचिका और दस्तावेजों से जुड़े बिंदु:

  • अतिरिक्त दस्तावेजों की अनुमति: शिकायतकर्ता और वरिष्ठ वकील विकास त्रिपाठी ने अदालत से मामले में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए अनुमति और समय की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

  • तारीखों का विवाद: यह पूरी शिकायत वर्ष 1980 में मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम जोड़े जाने से जुड़ी हुई है, जबकि दस्तावेजों के अनुसार वे आधिकारिक तौर पर अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। हालांकि, हाल ही में वकीलों की हड़ताल के चलते इस मामले पर निर्धारित दिन सुनवाई नहीं हो सकी थी।

🔄 सत्र न्यायालय ने पिछले आदेश को किया रद्द; मजिस्ट्रेट अदालत को दिए नए सिरे से विचार के निर्देश

न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की टिप्पणियां:

  • सेशन कोर्ट का फैसला: सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में पिछले उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें एसीजेएम (ACJM) ने सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया था। विशेष न्यायाधीश (MP-MLA मामले) विशाल गोगने ने 21 सितंबर को मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ विकास त्रिपाठी की पुनरीक्षण याचिका को मंजूर कर लिया था।

  • बिना तर्क के खारिज हुई थी शिकायत: सत्र न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालत की शिकायत को एक ऐसे रिकॉर्ड की फोटोकॉपी के आधार पर खारिज कर दिया गया था, जिसकी कोई विधिवत पुष्टि नहीं हुई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछला आदेश बिना किसी ठोस तर्क या कारण के दिया गया था, इसलिए उसे कानूनी रूप से खारिज किया जाना जरूरी था।

🔍 नागरिकता और मतदाता सूची के नियम; पुलिस रिपोर्ट मंगवाकर होगा विस्तृत फैसला

आगे की कानूनी कार्रवाई:

  • संवैधानिक प्रावधान: अदालत ने इस बात पर गौर किया कि कानूनन मतदाता सूची केवल देश के वैध नागरिकों के लिए होती है। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार 1980 में नाम होने, 1982 में हटने और फिर 1983 में दोबारा जुड़ने का जिक्र किया गया है, जिसमें सफदरजंग रोड, नई दिल्ली का पता दर्ज था।

  • पुलिस स्थिति रिपोर्ट: पुनरीक्षण न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि वह खुद मजिस्ट्रेट की भूमिका नहीं निभाएगा, बल्कि मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए वापस भेज रहा है। अदालत संबंधित पुलिस अधिकारी से मामले की स्थिति रिपोर्ट (Status Report) मंगवाएगी और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद एक विस्तृत व न्यायसंगत आदेश पारित किया जाएगा।






 

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