दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जेकेएलएफ (JKLF) के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ धनशोधन (मनी लॉन्ड...
दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जेकेएलएफ (JKLF) के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, यह पूरा मामला अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान से हवाला के जरिए फंडिंग लेने से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने यासीन मलिक के अलावा अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह, बारामूला के सांसद शेख अब्दुल रशीद (इंजीनियर रशीद), जहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और एक अन्य फर्म के खिलाफ यह आदेश जारी किया है।
🏛️ विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत का फैसला, 30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) की धारा 3 और 4 के तहत इन सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर सभी सातों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह पैदा होता है। सुरक्षा कारणों से 30 सितंबर को आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका था, जिसके बाद जज ने ईडी को निर्देश दिया कि वे जेलों में जाकर आरोपियों से आरोपों पर हस्ताक्षर करवाएं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 अक्टूबर को होगी।
💰 ईडी का खुलासा: हवाला और विदेशी चंदे के जरिए जुटाए गए थे 8.94 करोड़ रुपये से अधिक
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने अपराध से हुई कमाई के तौर पर 8.94 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा की थी। यह मामला 2017 के एनआईए (NIA) के उस केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप तय किए गए थे। एजेंसी का आरोप है कि यासीन मलिक ने 'आजादी' के नाम पर आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए दुनिया भर में एक बड़ा ढांचा तैयार किया था, जबकि सांसद इंजीनियर रशीद को भी हवाला के जरिए पैसे मिलने की बात सामने आई है।

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