सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के संदर्भ में न्याय प्रणाली और का...
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के संदर्भ में न्याय प्रणाली और कानून की लंबी प्रक्रिया पर बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि हमारे देश में दुर्भाग्य से दोष सिद्ध होने या बरी होने से पहले का समय ही अपने आप में एक सजा बन जाता है और पूरी कानूनी प्रक्रिया ही सजा जैसी प्रतीत होने लगती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश मामलों में जमानत मिलना एक सामान्य प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन कुछ विशेष कानून और प्रावधान ऐसे हैं जो कड़े मामलों में जमानत देने से साफ रोकते हैं।
🏛️ फरवरी 2020 दंगों के मामले में यूएपीए के तहत बंद हैं उमर और शरजील: पूर्व जज ने बताया कानूनी प्रक्रिया का दर्द
दिल्ली के फरवरी 2020 दंगों के दौरान कथित साजिश रचने के आरोप में यूएपीए (UAPA) के तहत जेल में बंद शरजील इमाम को अगस्त 2020 और उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा इनकी जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस फैसले को बरकरार रखे जाने के बाद पूर्व जस्टिस कौल ने कहा कि उन्होंने और जस्टिस सुंदरेश ने अपने कार्यकाल के दौरान जमानत के मुद्दों पर काफी विचार-विमर्श किया था। उन्होंने माना कि कई बार कानूनी अड़चनों और कड़े कानूनों के कारण विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक हिरासत में रहना पड़ता है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

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