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Election Commission Controversy: 'अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो तो खेल का क्या मतलब?'—मुख्य चुनाव आयुक्त पर बरसे सचिन पायलट

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मिलने वाली कानूनी छूट पर कड़े सवाल ख...

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मिलने वाली कानूनी छूट पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों से देश की प्रमुख चुनावी संस्था की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। इसी को देखते हुए 'इंडिया' गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक 'सार्वजनिक महाभियोग कार्यवाही' आयोजित करने की योजना बना रहा है।

पायलट ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने आचरण में पक्षपात दिखाया है, जिससे भारतीय चुनाव आयोग की तटस्थता खतरे में पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ और कामकाज करने वाले लोकतंत्र की यह पहली शर्त है कि जनता का संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा बना रहे।

🏏 'अगर अंपायर ही पक्षपाती हो तो खेल का क्या मतलब?'

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में सचिन पायलट ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र किया।

  • 13.3 करोड़ नाम हटने का दावा: उन्होंने दावा किया कि देश भर में मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं।

  • अंपायर का उदाहरण: इस स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो, तो फिर खेल खेलने का क्या मतलब रह जाता है?"

देश की संस्थाओं पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि आखिरकार हम सब भरोसे पर ही काम करते हैं, लेकिन जब सिस्टम पर ही ऐसा व्यक्ति सवाल के घेरे में आ जाए जिसकी निष्पक्षता संदिग्ध हो, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

📋 ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पर्याप्त आंकड़े और सबूत मौजूद

सचिन पायलट ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीकों के चलते उनके खिलाफ 'सार्वजनिक महाभियोग' की प्रक्रिया चलाना जरूरी हो गया है।

  • उनके कार्यकाल के दौरान हुए फैसलों के खिलाफ पर्याप्त ठोस आंकड़े और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।

  • 'इंडिया' गठबंधन ने इसी सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'सार्वजनिक महाभियोग' प्रक्रिया चलाने की रूपरेखा तैयार की है, और 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के विरोध में रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली का भी आयोजन किया जा रहा है।

⚖️ नियुक्ति कानून और आजीवन छूट पर उठाए बड़े सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पायलट ने कहा कि पुरानी चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते थे।

  • उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार को एक ऐसा नया कानून लाने की क्या जरूरत आन पड़ी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ने के बाद भी जीवन भर के लिए कानूनी छूट प्रदान करता हो?

  • पायलट ने कहा कि देश में वे इकलौते ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन छूट मिलेगी, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

🗣️ संसद में जवाब देने से भाग रही है सरकार: पायलट

सरकार पर हमला बोलते हुए पायलट ने कहा कि मतदान के मौलिक अधिकार के सामने ही आज एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। संसद के कई सत्रों से चले आ रहे गतिरोध के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और देश की जनता के सवालों का जवाब देने में पूरी तरह विफल रही है। यही कारण है कि विपक्ष इन अहम मुद्दों को अब जनता की अदालत और सार्वजनिक मंचों पर उठाने के लिए मजबूर है। हालांकि, विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं, लेकिन जब संस्थाओं की निष्पक्षता पर ही संदेह गहराने लगे, तो जनता के बीच आवाज उठाना ही एकमात्र विकल्प बचता है।






 

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