गांधी जयंती के दिन देश की राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध की आव...
गांधी जयंती के दिन देश की राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध की आवाजें सड़कों पर गूंज उठीं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) ने मोर्चा संभाला, तो वहीं मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दोनों महानगरों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच हुए इन प्रदर्शनों ने एसआईआर (SIR) और मतदाता सूचियों को लेकर चल रहे विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
🚨 दिल्ली में आप नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई: जंतर-मंतर पर संजय सिंह, आतिशी और सौरभ भारद्वाज समेत एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा समेत कई दिग्गज नेता विरोध प्रदर्शन में उतरे थे। पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक हजार से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिसमें पार्टी के ये प्रमुख नेता भी शामिल रहे।
🇮🇳 मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP का 'जेल भरो' आंदोलन: तिरंगे के साथ पहुंचे आम नागरिक, चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग
दूसरी ओर, मुंबई के शिवाजी पार्क में पुलिस से अनुमति न मिलने के बावजूद CJP ने अपना घोषित 'जेल भरो' आंदोलन किया और CEC के इस्तीफे की मांग उठाई। इस आंदोलन की सबसे अनूठी तस्वीर आम नागरिकों और परिवारों की भागीदारी रही, जिसमें लोग अपने बच्चों के साथ तिरंगा लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की ताकत केवल संवैधानिक अधिकारों से नहीं, बल्कि मतदाता के इस भरोसे से है कि उसका वोट सुरक्षित है। इसलिए आयोग पर उठे सवालों का जवाब पुलिस की बैरिकेडिंग नहीं, बल्कि अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही होना चाहिए।

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