गाजियाबाद में हिंडन नदी को दूषित होने से बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से एक बार फिर गंभीर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. इस योजना के तहत नदी में ...
गाजियाबाद में हिंडन नदी को दूषित होने से बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से एक बार फिर गंभीर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. इस योजना के तहत नदी में गिरने वाले प्रमुख नालों के गंदे पानी को केमिकल के बजाय प्राकृतिक तरीकों से साफ किया जाएगा. इस संबंध में हाल ही में कुछ प्रतिष्ठित कंपनियों ने नगर निगम के समक्ष अपना प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन) दिया है, जिसके आधार पर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
🌿 बायो-रेमेडिएशन तकनीक का होगा इस्तेमाल, पहले चरण में इन तीन प्रमुख नालों पर होगा काम
जलकल विभाग के महाप्रबंधक केपी आनंद के अनुसार, पहले चरण में प्रयोग के तौर पर सिटी फॉरेस्ट, हिंडन विहार और कैला भट्टा के नालों को चुना गया है, जिनका गंदा पानी सीधे हिंडन में गिरता है. इन नालों के पानी को साफ करने के लिए 'बायो-रेमेडिएशन' (प्राकृतिक तकनीक) का सहारा लिया जाएगा. इस सफल प्रयोग के बाद नदी में गिरने वाले अन्य नालों के पानी को भी इसी तकनीक से शुद्ध किया जाएगा, जिससे नदी के जल की गुणवत्ता में काफी सुधार आने की उम्मीद है.
🏭 246 एमएलडी दूषित पानी गिरने की है समस्या, पूर्व की योजनाओं के बाद अब जगी नई उम्मीद
शहरी क्षेत्र के लगभग 9 नालों के जरिए रोजाना करीब 246 एमएलडी दूषित पानी हिंडन नदी में मिल रहा है, जिसमें अर्थला, करहेड़ा, इंदिरापुरम, प्रताप विहार और नंदग्राम जैसे नाले शामिल हैं. हालांकि इससे पहले भी नदी को बचाने के लिए कई योजनाएं बनी थीं, लेकिन वे लंबे समय तक परवान नहीं चढ़ पाई थीं. अब विभिन्न कंपनियों के आगे आने और आधुनिक प्राकृतिक तकनीकों के इस्तेमाल से हिंडन नदी के दिन बहुरने की एक नई उम्मीद फिर से जग गई है.

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