नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने जंतर-मंतर पर हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन को लेकर एक...
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने जंतर-मंतर पर हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
तुगलकाबाद एमबी रोड पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में वास्तविक छात्रों से ज्यादा "पंचर और चाबी बनाने वाले" लोग मौजूद थे। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों पर भी तीखा हमला बोला है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
📢 "बरगलाकर 20-50 हजार लोगों को ले जाया गया": जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बिधूड़ी ने दागे सवाल
अपने भाषण के अंत में पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि देश की विशाल आबादी में से 20 से 50 हजार लोगों को बहला-फुसलाकर वहां इकट्ठा किया गया था।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "वहां बेरोजगार पंचर लगाने वाले और ताला बनाने वाले लोग ज्यादा थे।" अपनी बात दोहराते हुए बिधूड़ी ने कहा कि वहां वास्तविक छात्र बेहद कम संख्या में थे और अन्य लोग अधिक मौजूद थे।
⚡ पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने वालों पर साधा निशाना: 'पंचर लगाने वालों की ही औलादें होंगी'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने वालों पर हमला बोलते हुए बिधूड़ी ने कहा, "क्या भारत का कोई बेटा या बेटी मोदी जी और देश के बारे में ऐसी बातें कर सकता है? ये पंचर लगाने वालों की ही औलादें और खानदान होंगे, जो प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की बातें कर रहे हैं।"
📱 पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम लाइव में दिया था बयान: अभद्र भाषा इस्तेमाल करने वाले युवाओं को किया था माफ
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम लाइव के दौरान जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र किया था।
पीएम मोदी ने कहा था कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके और उनकी दिवंगत मां के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज के अनुकूल नहीं है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने उदारता दिखाते हुए ऐसे भटके हुए युवाओं को माफ करने की बात कही थी।
🎓 NEET पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि: विरोध प्रदर्शन, इस्तीफे और NTA पर कार्रवाई
NEET पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। इसी क्रम में 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी।
विवाद बढ़ता देख तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की थी।

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