नोएडा: नोएडा एसटीएफ ने फर्जी कंपनियों के माध्यम से देश से करोड़ों रुपये हवाला के जरिये विदेश भेजने वाले चीनी नागरिक और उसके सहयोगी चार्टर्ड...
नोएडा: नोएडा एसटीएफ ने फर्जी कंपनियों के माध्यम से देश से करोड़ों रुपये हवाला के जरिये विदेश भेजने वाले चीनी नागरिक और उसके सहयोगी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके द्वारा 10 फर्जी कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी।
एसटीएफ के एएसपी आरके मिश्रा ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-83 स्थित संदिग्ध कंपनी 'वाईटीएल मैन्यूफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड' के संबंध में गोपनीय जानकारी मिली थी, जो चीन के नागरिक लियो लॉन्गहुई (निवासी चीन, हाल निवासी पूर्वांचल सिटी सेक्टर-93) द्वारा संचालित की जा रही थी। इस काम में चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार (निवासी गाजियाबाद) और कौशलेंद्र (निवासी औरैया) भी शामिल थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
💼 ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर बनाईं शेल कंपनियां: 50 करोड़ से अधिक की राशि विदेश भेजी
एसटीएफ की पूछताछ और तलाशी में इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ। गिरोह द्वारा बनाई गई 10 फर्जी कंपनियों का अब तक खुलासा हो चुका है, जिनमें दो हांगकांग, दो दिल्ली और छह गौतमबुद्ध नगर के पते पर रजिस्टर्ड हैं। इनके माध्यम से अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक विदेश भेजे जा चुके हैं और सैकड़ों करोड़ रुपये अवैध तरीके से चीन भेजने की आशंका के तहत जांच जारी है।
आरोपी चीनी नागरिक ने अपने ड्राइवर देवेंद्र के नाम पर 'हनुराज ट्रेडिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड' नाम से शेल कंपनी बनाई थी। इसके अलावा जेएनएस इंफ्रा हाइट्स, रिफान एंटरप्राइजेज, टिडीडेस्क एसेंशियल, जेड वन एंटरप्राइजेज, उपमेक्स इंडिया, मेजटेक पावर इंडिया, एक्सीलेंस मोबाइल टेक इंडिया तथा हांगकांग में रजिस्टर्ड हक हैंको कम्युनिकेशन और हक इंचियो लिमिटेड जैसी फर्जी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। वह चीन से कच्चा माल महंगे दामों पर मंगाता और बने सामान को दिल्ली के करोल बाग व नेहरू प्लेस में अंडर-इनवॉइसिंग करके बेचता था, जबकि शेष रकम हवाला से ट्रांसफर करता था।
🛂 2020 में वीजा खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से रह रहा था भारत में: फर्जी दस्तावेज बरामद
चीनी नागरिक लियो लॉन्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था और वर्ष 2020 में उसका वीजा समाप्त हो चुका था। इसके बाद भी वह वापस चीन नहीं गया और अवैध रूप से भारत में रहकर फर्जी पहचान पत्र बनवा लिए।
एसटीएफ को जांच के दौरान चीनी नागरिक के पास से फर्जी तरीके से बनवाया गया भारतीय पहचान पत्र, दो चीनी पासपोर्ट, दो पैन कार्ड, 4 करोड़ 72 लाख 69 हजार रुपये के चेक, 5 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, एक टैब, 10 कंपनियों की मुहरें और 11 चेकबुक बरामद हुई हैं। एसटीएफ ने फर्जी पहचान पत्र के मामले की रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंप दी है।
🔗 1400 करोड़ रुपये के लोन-गेमिंग ऐप घोटाले से जुड़े तार: एसटीएफ की जांच में हुए बड़े खुलासे
एसटीएफ इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने बताया कि इस मामले के तार वर्ष 2019 में हुए 1400 करोड़ रुपये से अधिक के लोन व ऑनलाइन गेमिंग ऐप घोटाले से जुड़े हैं। उस समय गिरफ्तार हुआ आरोपी रवि उर्फ नटवरलाल (जो पिछले 7 सालों से जेल में है) इस चीनी नागरिक की कंपनी वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग में शेयरहोल्डर रहा था।
एसटीएफ पिछले चार वर्षों से इस बड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और इस मामले में अब तक 12 चीनी नागरिकों समेत कुल 24 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। फिलहाल केंद्रीय एजेंसियों और एसटीएफ की संयुक्त टीम मामले की वित्तीय कड़ियों को खंगालने में जुटी है।

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