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गुरुग्राम को मिला 'टावर ऑफ जस्टिस': उत्तर भारत का सबसे बड़ा जिला कोर्ट

  चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने गुरुग्राम में रविवार को डिजिटल सुविधाओं से लैस कोर्ट 'टावर ऑफ जस्टिस' का लोकार्पण किया।...

 


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने गुरुग्राम में रविवार को डिजिटल सुविधाओं से लैस कोर्ट 'टावर ऑफ जस्टिस' का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और अर्जुन मेघवाल भी मौजूद रहे। सात एकड़ में बने इस नए विशाल जिला कोर्ट परिसर में 56 कोर्ट रूम, 530 वाहनों की पार्किंग, जिम, पुस्तकालय समेत कई सुविधाएं हैं। इस उत्तर भारत के सबसे बड़े जिला न्यायालय परिसर में गिना जा रहा है।

परिसर आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के विश्वास का केंद्र बनेगा। वहीं सीजेआई ने इस इस दौरान पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट और सरकार को हरियाणा में भी ऐसी अदालत शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ‘विकास के साथ मुकदमे भी बढ़ रहे, सबसे ज्यादा मामले जमीन विवाद के, इसे देखते हुए अदालतों को एक ही जगह पर लाने और अपग्रेड करने की जरूरत। गुरुग्राम का टावर ऑफ जस्टिस इसी का उदाहरण है। यूपी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एकीकृत अदालत शुरू करने की तैयारी, यहां मामलों की तेजी से सुनवाई होगी और रियल टाइम डाटा अपलोड होगा।’

सीएम ने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा?

वहीं लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘यह नया परिसर डिजिटल युग की भी मिसाल बनेगाजहां पुराने परिसर में मात्र 45 अदालत कार्यरत थी वहीं अब 55 अदालत कक्ष टावर ऑफ जस्टिस में न्याय की सेवा करेंगे। परिसर आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के विश्वास का केंद्र बनेगा। यह टॉवर भरोसे, संविधान की मर्यादा और करोड़ों नागरिकों के उस विश्वास से बना जो वह हमारी न्यायपालिका पर रखते हैं।’

'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' की तर्ज पर ही

सीएम ने आगे कहा 'दो टावरों में फैला यह परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में गिना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश जिस तरह 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' को मजबूत कर रहा है उसी प्रकार हमें 'इज ऑफ जस्टिस' को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना होगा। नए परिसर के जरिए मामलों को जल्दी निपटाने में मदद मिलेगी और साख ही यह न्याय को आम आदमी के और करीब लेकर आएगा।'

पुराने परिसर का एक हिस्सा आधुनिक चैंबर में तब्दील होगा

आपको बता दें कि अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने पुराने न्यायालय परिसर के एक हिस्से को अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर के निर्माण के लिए देने की भी घोषणा की। आपको बता दें कि लोकार्पण कार्यक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा भी मौजूद थे।

 






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