पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) से जुड़े बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के काम में बा...
पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) से जुड़े बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के काम में बाधा डालने और बदसलूकी करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, एक पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (स्पेशल एजुकेशन) की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के काम के सिलसिले में वह 5 जुलाई को फाटक तेलियान में था। महिला टीचर का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान एक आरोपी ने उससे बीएलओ रजिस्टर ले लिया और मना करने के बावजूद जांघ पर रखकर हस्ताक्षर किए। शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि एक अन्य आरोपी ने उसे गाली दी, SIR फॉर्म लेने से मना कर दिया और ऐसा व्यवहार किया जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई और सरकारी काम में रुकावट डाली।
15 जुलाई को मिली शिकायत
पुलिस ने बताया कि इस घटना की जानकारी 15 जुलाई को मिली थी। महिला शिकायतकर्ता ने इस मामले में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) से संपर्क किया था और फिर उन्होंने ही पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी शिकायत दर्ज करने में देरी पर महिला का कहना है कि वह अपने सीनियर अधिकारियों से सलाह ले रही थीं कि आगे क्या जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
मामले में जांच जारी
पुलिस ने बताया कि तुर्कमान गेट इलाके के रहने वाले चार आरोपियों की पहचान मोहम्मद सबरीन (44), अतीक-उर-रहमान (58), मोहम्मद आसिफ (50) और मोहम्मद आफताब (44) के रूप में हुई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर महिला टीचर के साथ हुए कथित बदसलूकी की जांच करेगी।
दिल्ली में बढ़ी तारीख
भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में चल रहे SIR की तारीखों में बड़ा बदलाव किया है। यह प्रक्रिया अब 10 दिन और चलेगी। राजधानी में 29 जुलाई को खत्म हो रही ये प्रक्रिया अब 8 अगस्त तक जारी रहेगी वहीं वोटर लिस्ट का ड्रॉफ्ट 17 अगस्त को जारी किया और उसी दिन से 16 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जाएंगी। इसके बाद दावे और आपत्तियों पर नोटिस की प्रक्रिया 17 से 15 अक्टूबर तक और फिर 19 अक्टूबर को फाइनल लिस्ट जारी होगी।
बीएलओ क्या होता है?
आपको बता दें कि घर-घर जाकर वोटर्स तक गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फार्म) पहुंचाना, डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और फिर उनका डिजिटलीकरण करना बीएलओ के जिम्मे होता है। इस दौरान उन्हें आवंटित इलाके में यह काम करना होता है। बीएलओ स्थानीय सरकारी या अर्द्ध-सरकारी कर्मचारी होता है जिसे चुनाव आयोग द्वारा तैनात किया जाता है। बीएलओ जिस एरिया में रहता है उसी में ही उसे नियुक्ति भी मिलती है। बीएलओ का काम वोटर लिस्ट से जुड़ा होता है।

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