नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अपनी अन्य मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और सरकार...
नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अपनी अन्य मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और सरकार को दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे रही है। प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी का सबसे अधिक जोर आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज 'एफआईआर (FIR) वापसी' की मांग पर है।
संगठन की मांग है कि दिल्ली समेत एनडीए (NDA) शासित जिन भी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत बिना शर्त वापस लिया जाए। सीजेपी इस मांग पर इस कदर अड़ी है कि उसने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय शर्तों को भी मानने से साफ इनकार कर दिया है।
📜 क्या हैं सीजेपी की दो प्रमुख मांगें: एफआईआर रद्द करने और पीड़ित परिवारों के लिए ₹1-1 करोड़ मुआवजे का मुद्दा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद सीजेपी मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है:
पहली मांग (FIR वापसी): आंदोलनकारियों के खिलाफ देश के किसी भी हिस्से या दिल्ली में दर्ज की गई सभी पुलिस एफआईआर को बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिया जाए।
दूसरी मांग (मुआवजा राशि): नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के कारण खुदकुशी करने वाले 20 से अधिक छात्रों के पीड़ित परिवारों को सरकार 1-1 करोड़ रुपये का वित्तीय मुआवजा प्रदान करे।
⚖️ 'केस वापसी पर कोई शर्त मंजूर नहीं, सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनेंगे': CJP प्रवक्ता सौरभ दास का बड़ा बयान
सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के मामले में उन्हें किसी भी तरह की शर्त स्वीकार्य नहीं है, भले ही वह शर्त सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही क्यों न रखी गई हो। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने पहले समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में और फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर स्थिति साफ की।
दास ने कहा कि सरकार को पुलिस के लिए स्पष्ट और बिना शर्त आदेश जारी करना होगा। सीजेपी को सुप्रीम कोर्ट का वह निर्देश भी मंजूर नहीं है जिसमें दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर एक्शन लेने की बात कही गई है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 18 साल से कम उम्र के उन युवाओं को रिहा करने का आदेश दिया है जिनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
🛡️ अपराधियों के खिलाफ भी एफआईआर जारी रखने के खिलाफ क्यों है CJP: संगठन ने दिया तर्क
सौरभ दास ने तर्क दिया कि सरकार यह बहाना बनाकर एफआईआर जारी नहीं रख सकती कि प्रदर्शन में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल थे। उन्होंने सभी एफआईआर वापस लेने की मांग करते हुए कहा:
"यदि कोई क्रिमिनल आंदोलन में घूम रहा था, तो उनके पुराने मामलों में उनकी जमानत रद्द की जानी चाहिए थी। सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि वे समाज में इतनी आजादी से कैसे घूम रहे थे। लेकिन सरकार इस बहाने का इस्तेमाल असली और निर्दोष आंदोलनकारियों को निशाना बनाने के लिए नहीं कर सकती।"
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार को ऐसी कोई छूट दी गई तो वह इसका गलत इस्तेमाल करेगी, जिसे युवा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। संगठन ने दोहराया कि वह अपने हर एक प्रदर्शनकारी के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

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