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सोमनाथ भारती की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने मालवीय नगर चुनाव पर मांगा जवाब

  सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती की उस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमे...

 


सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती की उस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें उन्होंने साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में मालवीय नगर सीट से भाजपा उम्मीदवार सतीश उपाध्याय की जीत को गलत बताते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है। इस मामले में हाई कोर्ट ने भारती के खिलाफ फैसला दिया था, जिसके बाद अब उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि वह इस मामले की विस्तार से सुनवाई करेगी।

दरअसल पिछले साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर सीट पर भाजपा प्रत्याशी उपाध्याय ने भारती को 2,131 मतों के अंतर से हरा दिया था। आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव में उतरे भारती को 37,433 वोट मिले थे, जबकि उपाध्याय ने 39,564 वोट हासिल किए थे।

भारती ने हाई कोर्ट में दी थी नतीजे को चुनौती

8 फरवरी को चुनाव नतीजे आने के बाद भारती ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस परिणाम को चुनौती दी थी, हालांकि हाई कोर्ट ने 17 जनवरी को उनकी याचिका को खारिज करते हुए उपाध्याय की जीत को सही ठहराया था। हाई कोर्ट ने भारती की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिका में एक गंभीर कानूनी कमी थी और यह कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं थी। अब भारती ने हाई कोर्ट के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

सिब्बल बोले- गलत आधार पर खारिज हुई थी याचिका

भारती का पक्ष रखते हुए उनके वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उच्च न्यायालय ने भारती की चुनाव याचिका को इस गलत आधार पर खारिज कर दिया था कि वह कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र कुमार कोचर को मामले में जरूरी पक्ष बनाने में नाकाम रहे थे।

भारती ने भाजपा प्रत्याशी पर लगाया गलत तरीके अपनाने का आरोप

भारती ने भाजपा प्रत्याशी पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (ROPA) के तहत कई गलत तरीके अपनाने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था और चुनाव रद्द करने की मांग की थी। अपनी याचिका में भारती ने उपाध्याय पर मतदाताओं को गलत तरीके से लुभाना, वोटर लिस्ट में हेरफेर, चुनावी खर्च का खुलासा न करना, मतदाताओं को कार से पोलिंग बूथ तक लाने के लिए अपने एजेंट तैनात करने और कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र कुमार कोचर के साथ मिलीभगत करना जैसे आरोप शामिल थे।

‘भाजपा प्रत्याशी ने नहीं दी आपराधिक शिकायतों की जानकारी’

इसके अलावा भारती ने हाई कोर्ट में यह भी दावा किया था कि उपाध्याय ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ लंबित किसी आपराधिक शिकायत या FIR से जुड़ी किसी जानकारी का खुलासा नहीं किया था, जबकि चुनाव कानून के तहत ऐसा करना अनिवार्य था। भारती का एक मुख्य आरोप यह था कि उपाध्याय ने कथित तौर पर भारती के वोट बांटने के लिए कोचर के कैंपेन को फंड किया था, जो इस अधिनियम की धारा 123 के तहत रिश्वतखोरी और अनुचित प्रभाव डालने जैसा था।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के जस्टिस जसमीत सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि भारती ने कांग्रेस प्रत्याशी कोचर को जरूरी पक्ष नहीं बनाया, जबकि उन्होंने खुद कोचर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। जज ने कहा कि यह एक ऐसी चूक है जिसके कारण 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत मामला खारिज करना अनिवार्य हो जाता है।








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