देश की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित 160 साल पुराने ऐतिहासिक और गौरवशाली टाउन हॉल (Town Hall) का एक हिस्सा अचानक ढह गया है। इसके आसपास...
देश की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित 160 साल पुराने ऐतिहासिक और गौरवशाली टाउन हॉल (Town Hall) का एक हिस्सा अचानक ढह गया है। इसके आसपास हर समय रहने वाली भारी चहल-पहल और व्यस्तता के बीच इस ऐतिहासिक धरोहर का टूटना विभागों की बड़ी लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है। हालांकि गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी भी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, इस घटना के बाद ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एमसीडी प्रशासन ने इस साल टाउन हॉल के कायाकल्प की तैयारियां शुरू जरूर की थीं, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अभी तक संरक्षण और पुनर्विकास परियोजनाओं की औपचारिक अनुमति नहीं मिल पाई है। वर्तमान में यह जर्जर इमारत पूरी तरह बंद है और किसी भी आम आदमी के प्रवेश पर रोक है।
🛑 "टाउन हॉल की इमारत बेहद जर्जर है, किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं": महापौर का बयान
महापौर की प्रतिक्रिया और एएसआई से पत्राचार:
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: इस घटना को लेकर महापौर प्रवेश वाही ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि टाउन हॉल का एक हिस्सा ढह गया है, लेकिन गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इमारत अत्यंत जर्जर हालत में है और सुरक्षा कारणों से किसी को भी इसके अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
एएसआई से मंजूरी का इंतजार: निगम प्रशासन ने टाउन हॉल के संरक्षण और इसकी अनमोल हेरिटेज को संजोए रखने के लिए दो साल पहले एएसआई को पत्र लिखा था। लगातार पत्राचार के बावजूद अभी तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षण कार्यों की हरी झंडी नहीं मिली है। एहतियात के तौर पर ढहे हुए हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है।
📜 ऐतिहासिक महत्व: 1 जून 1863 को हुई थी एमसीडी की पहली बैठक; 2012 तक रहा निगम मुख्यालय
टाउन हॉल का शानदार राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास:
पहली बैठक: निगम अधिकारियों के अनुसार, चांदनी चौक स्थित इस ऐतिहासिक टाउन हॉल में दिल्ली नगर निगम (MCD) की सबसे पहली बैठक 1 जून 1863 को आयोजित की गई थी।
मुख्यालय का सफर: वर्ष 1957-58 में औपचारिक रूप से एमसीडी की स्थापना के बाद से लेकर वर्ष 2009 के अंत तक यह टाउन हॉल दिल्ली नगर निगम का मुख्य मुख्यालय रहा। यहां सदन की बैठकों के साथ तमाम प्रशासनिक और नीतिगत फैसले लिए जाते थे, जिसके बाद कार्यालय को मिंटो रोड स्थित नए सिविक सेंटर में स्थानांतरित किया गया।
👑 वर्ष 1861 में 'दिल्ली इंस्टीट्यूट' के रूप में हुआ था निर्माण; देश के कई प्रधानमंत्री कर चुके हैं शिरकत
टाउन हॉल की वास्तुकला और राष्ट्रीय महत्व:
निर्माण का इतिहास: एमसीडी की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगांई ने बताया कि निगम के स्वामित्व वाला यह 160 साल पुराना भवन वर्ष 1861 से 1866 के बीच ‘दिल्ली इंस्टीट्यूट’ के रूप में बनाया गया था, जिसे बाद में 1866 में नगर निगम मुख्यालय बना दिया गया। 1935-39 के दौरान इसका विस्तार कर इसे दो मंजिला विंग (पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी) के रूप में विकसित किया गया।
प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमान: इस भवन का राष्ट्रीय महत्व रहा है। वर्ष 1957 में जब पहली बार एमसीडी का गठन हुआ, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इसके उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां विभिन्न बैठकों में शामिल हुए। एक समय में हैदराबाद हाउस से पहले अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत दुनिया भर के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और विदेशी राजनयिकों का सार्वजनिक नागरिक अभिनंदन इसी टाउन हॉल के पार्क में होता था।
💡 100 करोड़ की लागत से आधुनिक संग्रहालय और व्याख्या केंद्र बनाने की है योजना; जल्द शुरू होगा काम
पुनर्विकास की नई योजनाएं और भविष्य का खाका:
पूर्व के प्रस्ताव: वर्ष 2011 में जब निगम कार्यालय सिविक सेंटर शिफ्ट हुआ, तब यहां हेरिटेज होटल, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाने के तीन प्रस्ताव लाए गए थे, लेकिन उन पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ।
100 करोड़ का नया प्रोजेक्ट: अब दिल्ली नगर निगम ने इस वर्ष अप्रैल में चांदनी चौक स्थित इस धरोहर के संरक्षण और पुनर्विकास को मंजूरी दी है। इसके तहत 160 साल पुराने टाउन हॉल को एक आधुनिक समावेशी संग्रहालय (Museum) और व्याख्या केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
एमओयू साइन: इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर निगम प्रशासन और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) मिलकर काम करेंगे, जिसे लेकर दोनों विभागों के बीच समझौता भी हो चुका है। इस पूरे कायाकल्प कार्य पर लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

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