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National Security Act NSA Case India: सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलील, जानें यूपी में कैसे लगता है एनएसए

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उन पर 5 लाख रुपय...

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उन पर 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया था और आकृति चौधरी पर लगे एनएसए (NSA) को रद्द कर दिया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान डीएम की तरफ से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत का आदेश एक लंबी प्रक्रिया से गुजरता है और इसमें जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका सिर्फ एक अंतिम कड़ी मात्र होती है, न कि पूरे फैसले की अकेली जिम्मेदारी.

🏛️ 2. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर वकील मुकुल रोहतगी की दलील—डीएम को बिना सुने लगाया गया था जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट में डीएम मेधा रूपम की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोरदार तर्क रखा कि हाईकोर्ट ने बिना कोई नोटिस दिए और बिना सुने ही डीएम पर कठोर आदेश पारित करते हुए 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया, जो पूरी तरह अनुचित है. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को समझाया कि NSA की प्रक्रिया थाना स्तर के एसएचओ (SHO) से शुरू होकर डीसीपी, कमिश्नर और फिर जिला मजिस्ट्रेट तक पहुंचती है, यानी इसमें कई प्रशासनिक स्तर और पदानुक्रम शामिल होते हैं.

🛡️ 3. क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980? जानिए इसके प्रावधान और पूरा कानूनी दायरा

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 एक निवारक निरोध कानून है जिसे देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किया गया था. सामान्य गिरफ्तारी किसी अपराध के बाद होती है, जबकि निवारक हिरासत का उद्देश्य किसी को भविष्य में अपराध करने से रोकना होता है. इस कानून के तहत केंद्र, राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्तों को यह अधिकार मिलता है कि वे देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले व्यक्ति को बिना औपचारिक आरोप के भी हिरासत में ले सकें, और इसी बहुस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नोएडा डीएम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है.







 

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